सपने ||| VJ |||


प्रेमी अपनी प्रेमिका को हर जगह ढूंढ रहा है।
जब वो दुनिया मे प्रेमी जोड़ों को देखता है तो सोचता है कि
इस दुनिया मे कोई उसकी प्रेमिका भी होगी,
वो हर जगह अपनी प्रेमिका को ढूंढता है,

पहले उसने उसे परायो में ढूंढा,
फिर अपनो में,
पर वो उसे कही नही मिली,
जब थककर वो प्रेमी वापस घर आता है
तो बहुत दुखी होता है,

वो अपनी प्रेमिका के खयालो में खो जाता है
और नींद के आगोश में चला जाता है,

तभी उसे अपने सपनो में अपनी प्रेमिका मिल जाती है,
प्रेमी उसे देख झूम जाता है
वो खुशी से फूला नही समाता,
अपनी प्रेमिका से वो अपने प्रेम का इज़हार करता है,
उसे अपने दिल का हाल बताता है।
प्रेमिका उसके प्रेम को स्वीकार कर लेती है और दोनों
कृष्ण राधा की तरह प्रेम के सागर में डूब जाते है।

उसकी प्रेमिका इस बाहरी दुनिया मे नही
अपितु उसकी सपनो की दुनिया मे थी
अब वो रोज़ अपनी प्रेमिका से मिलने लगा,
दोनों खुशी से रोज़ अपने प्रेम में डूब जाते थे।
अब प्रेमी अपनी प्रेमिका से बहुत अधिक प्रेम करने लगा था
इतना कि वो अब एक पल भी उससे अलग नही होना चाहता
वो नही चाहता कि उसकी प्रेमिका को कोई दुख या किसी वस्तु की कमी हो।

उसके सपनो में वो दोनों बहुत अधिक खुश थे
न कोई कमी थी और न ही कोई दुःख,

परन्तु एक दिन प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को अपने सपनो से बाहर लाने की सोची,
वो चाहता था कि उसकी प्रेमिका अब इस वास्तविक दुनिया मे आये और उसके साथ रहे

प्रेमिका वही रहना चाहती थी पर अपने प्रेमी के कहने पर वो इस वास्तविक दुनिया मे आती है।
प्रेमिका को यह दुनिया बहुत अधिक पसंद आती है
उसे लगता है कि सपनो की दुनिया से ज्यादा सुख यहां है,
अब प्रेमिका इस दुनिया की सुंदरता को निहारने लगती है।

प्रेमी बहुत खुश होता है कि जो उसके खयालो में थी वो अब हकीकत है।
अब प्रेमिका इस दुनिया मे रम सी जाती है, प्रेमिका को अब अपने प्रेमी से अधिक यह दुनिया प्यारी लगने लगी,

पर इस वास्तविक दुनिया मे प्रेमिका को दुख भी मिलने लगे कभी दुसरो से तो कभी प्रेमी से,
जब प्रेमी ने यह देख तो उसे अहसास हुआ कि उसने प्रेमिका को वास्तविक दुनिया मे लाकर गलत किया,

यहां उसे कष्ट,दुख मिल रहे है जो प्रेमी कतई नही चाहता
प्रेमी नही चाहता कि उसकी प्रेमिका की आंखों में आंसू आये
इसलिए अब प्रेमी अपनी प्रेमिका को वापस उसी दुनिया मे ले जाना चाहता है
जंहा उसे कोई तकलीफ नही थी

प्रेमी वापस उसे अपने सपनो की दुनिया मे ले जाना चाहता है,
पर प्रेमिका अब वापस नही जाना चाहती वो अब इस वास्तविक दुनिया मे ही रहना चाहती है,
प्रेमी उसे इस दुनिया के दुखों से अवगत कराता है
पर प्रेमिका उसकी एक नही सुनती वो सब सहने तो तैयार है
पर अब उसे यही रहना है

अब प्रेमी को पछतावा होने लगता है की क्यो वो प्रेमिका को इस वास्तविक दुनिया मे लाया जहां उसे हर कदम पर आंसू मिल रहे है
प्रेमी विनती करता है प्रेमिका से वापस चलने को पर प्रेमिका नही मानती और उसे भी यही रुकने को कहती है
पर प्रेमी अब ओर इस वास्तविक दुखो की दुनिया मे नही रहना चाहता वो वापस अपने सपनो की दुनिया मे जाना चाहता है जहाँ दुखो का नाम तक नही था, जहाँ हर सुख सम्पदायें थी सुविधाएं थी

अब वो प्रेमिका को यही छोड़कर जाने का निश्चय कर लेता है और प्रेमिका से दूर होने के लिए उससे प्रेम नही करने का बहाना करता है, उसपर गुस्सा करता है, उसे रुलाता है,

उसे जताने की कोशिश करता है की वो उससे प्रेम नही करता उससे दूर जाना चाहता है।
प्रेमिका बहुत दुखी होती है और उसकी आंखों से अश्रुओ
की जैसे बाढ़ आ जाती है
प्रेमिका अपने प्रेमी से दूर नही होना चाहती

तब वो अपने प्रेमी से कहती है कि "हम उस दुनिया मे खुश थे फिर क्यो तुम मुझे इस वास्तविक दुनिया मे लाये,
और जब में यही रहना चाहती हु तो क्यो तुम मुझे वापस कैद करना चाहते हो"

अर्थात प्रेमिका को सपनो की दुनिया बंधन और यह वास्तविक दुनिया स्वतंत्र नभ की तरह लग रही थी।

तब प्रेमी को अहसास होता है कि उसकी प्रेमिका के सभी दुखो का कारण वो खुद है
उसी की वजह से प्रेमिका व्यथित है

प्रेमी के मन में अब सवालो का पहाड़ खड़ा हो जाता है,
क्यो वो प्रेमिका को इस वास्तविक दुनिया मे लाया?
जिस दुनिया को वो कैद मानती है
क्यो वापस उसे वही ले जाना चाहता है?
यह उसका प्रेम है , उसके साथ रहने की ज़िद या स्वार्थ,
क्यो वो अपनी प्रेमिका को रुला रहा है?
बस इन्ही सवालो के जवाब ढूंढते ढूंढते प्रेमी इसी दुनिया मे खो जाता है।

प्रेमी पहले अपनी प्रेमिका को ढूंढ रहा था
अब अपने सवालो के जवाब ढूंढ रहा है
और मजबूरन वो इस वास्तविक दुनिया मे रह रहा है।
Vijay Merotha

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