INDIAN GODS : Technologies and Mysteries || VJ ||
Reality of TheINDIAN GODS
Technologies and Mysteries
(यह लेख शोध तथा तथ्यों से जुड़ा है इसमें उल्लेखित तथ्यो में पौराणिक कथाओं कहानियों को अंधविश्वास से हटकर विज्ञान से जोड़ा गया है ताकि घटनाओ को वास्तविकता से जोड़ा जा सके।
लेख का उद्देश्य किसी धर्म, जाति, संस्थान या किसी विशेष व्यक्ति की भावनाओ को ठेस पहुचाना नही है।)
प्रस्तावना:-
भारतीय धर्म ग्रंथो के अनुसार सृष्टि की उत्त्पत्ति ब्रह्मा से मानी जाती है तथा ब्रम्हा की उत्पत्ति विष्णु से,
परन्तु धर्म ग्रंथो में विष्णु की उत्पत्ति से संबंधित कोई स्पष्ट जानकारी नही
कुछ ग्रंथो में विष्णु की उत्पत्ति शिव से बताई गई है
तो कुछ ग्रंथो में दोनों की उत्पत्ति देवी से
तो फिर विष्णु और शिव वास्तविकता में आये कहा से थे?
जिन्हें सृष्टि का संचालक तथा संहारक कहा गया।
विष्णु का सम्पूर्ण जीवन सार विष्णु पुराण में है जिसके अनुसार विष्णु से ही शिव और ब्रह्मा उत्पन्न हुए है
और इसी प्रकार शिव पुराण में शिव से विष्णु और विष्णु से ब्रह्मा की उत्पत्ति बताई जाती है, तो फिर वास्तविकता क्या है
शिव तथा विष्णु का जन्म हुआ कैसे ,कहा हुआ और क्यो ये मनुष्यो से भिन्न थे?
धर्म ग्रंथो के अनुसार विष्णु तथा अन्य देवता समय-समय पर धरती पर आते थे और मनुष्यों को नई नई तकनीक सिखाते थे, समस्याओ का समाधान करते थे, रहना , जीना सिखाते थे
परन्तु ऐसा ज्ञान देवताओ के पास आया कहा से
और क्यो उन्होंने पृथ्वी को नई दिशा दी?
ग्रंथो के अनुसार वे आसमान से धरती पर आते थे और आसमान में ही वापस चले जाते थे
पर वो आते कहा से थे,
आसमान में कहा से?
उनका रूप मनुष्यो जैसा होता था
परन्तु उन्हें देवता माना जाता था क्योंकि उनके पास विचित्र दैवीय शक्तिया थी जो इंसान ने पहले कभी नही देखी थी।
भारतीय धर्म ग्रंथो में ब्रम्हाण्ड में कई अलग-अलग संसारो का वर्णन है जहाँ अलग-अलग प्रकार के लोग रहते थे
पाताल लोक
मृत्यु लोक
देवलोक(स्वर्ग लोक , बैकुण्ठ लोक, ब्रह्म लोक)
पाताल लोक तथा मृत्यु लोक पृथ्वी पर बताये जाते है
परंतु देवलोक को भिन्न बताया गया है
तो फिर देवलोक कहा था
पृथ्वी के बाहर या ब्रम्हाण्ड के किसी दूसरे कोने में, किसी दूसरी आकाश गंगा में।
ब्रम्हाण्ड कितना बड़ा है किसी को नही पता ,
जिस आकाशगंगा में हमारा सौरमंडल है उसी आकाश गंगा में करोड़ो ग्रह है और ऐसी कितनी ही आकाश गँगाये ब्रम्हाण्ड में है
तो क्या ये नही हो सकता कि
देवलोक ऐसे ही किसी अन्य ग्रह पर था जो कि पृथ्वी से सेकड़ो मीलो दूर किसी अन्य आकाशगंगा के किसी ग्रह पर हो,
तो क्या जिन्हें हम हमारे ईश्वर मानते है वो वास्तविकता में
परग्रही थे
जो किसी अन्य ग्रह से धरती पर आते थे
और जो ग्रह पृथ्वी से भी अधिक उन्नत था,
जहाँ आज के वर्तमान से भी अधिक उत्कृष्ठ तकनीके थी
जिनको देख पृथ्वी के मनुष्यो ने उन्हें देवता समझ लिया
उस समय के मनुष्य विज्ञान से अपरिचित थे तो हो सकता है कि देवताओ ने अन्य ग्रहों से आकर पृथ्वी पर अपनी तकनीको का प्रदर्शन किया जिसे पृथ्वी के लोगो ने चमत्कार समझ लिया
और उनकी पूजा करने लगे।
तो क्या उस समय अपनी उन्नत तकनिक के बल पर वो देवता हमारे ईश्वर बन गए।
क्योकि जिन घटनाओ और तकनीको का उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथो में मिलता है वो सभी एक अन्य पहलू के माध्यम से विज्ञान से जुड़े है
बस उन्हें एक अलग दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।
सभी घटनाओं और तथ्यों पर हम आने वाले मुख्य भागो में चर्चा करेंगे।
Vijay Merotha
सभी घटनाओं और तथ्यों पर हम आने वाले मुख्य भागो में चर्चा करेंगे।
Vijay Merotha




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