ARTICAL GANDHI By VIJAY MEROTHA

ARTICAL GANDHI

NATURAM GODSE RIGHT OR WRONG

प्रस्तावना:-
आर्टिकल गाँधी

यह लेख मोहनदास करमचंद गांधी तथा नाथूराम गोडसे पर आधारित है
इस लेख में महात्मा गांधी द्वारा किये गए कार्यो का साक्ष्यो के आधार पर राजनीतिक तथा धार्मिक विश्लेषण किया गया है
साथ ही गांधी तथा गोडसे के बारे में एक सर्वे किया गया था जिसके बारे में निष्कर्ष में चर्चा होगी।

लेख दो भागों में प्रकाशित होगा-
भाग-1 महात्मा गांधी: सही या गलत
भाग-2 नाथूराम गोडसे: सही या गलत
(सर्वे में जनता द्वारा दिये गए मतो की चर्चा भाग-2 के निष्कर्ष में होगी)
(प्रकाशित लेख में लिखे गए तथ्य शोध, पुस्तको, लोगो के विचारों तथा मेरे स्वयं के विचारों पर आधारित है, लेख के माध्यम से हमारा उद्देश्य किसी की भी भावनाओ को ठेस पहुचाना तथा किसी व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाना या उनपर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी करने का कतई नही है। )

भाग-1
ARTICAL GANDHI
महात्मा गांधी: सही या गलत

मोहनदास करमचंद गांधी
पिता- करमचंद गांधी
माता- पुतलीबाई





  • जन्म- 2 अक्टूबर 1869
  • जन्म स्थान- पोरबंदर, काठियावाड़, गुजरात, भारत
  • पेशा- वक़ील
  • शिक्षा- यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन
  • मृत्यु- 30 जनवरी 1948 (78 वर्ष की आयु में)
  • स्थान- नई दिल्ली, भारत
  • मृत्यु का कारण- नाथूराम गोडसे द्वारा हत्या

(लेख में महात्मा गांधी के सम्पूर्ण जीवन कि चर्चा नही है। लेख में सिर्फ गांधी से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओ की चर्चा है। )

वैश्विक छवि:-

मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। 
गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था।उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं।
प्रति वर्ष २ अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है।
1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्‍यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था।

महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ो को भारत से भागने के लिए कई प्रयास करे जिसमे "अंग्रेजो भारत छोड़ो" आन्दोलन(1942) शामिल है।
महात्मा गांधी ने भारत में कई सत्याग्रह किये, जो भारत के हित में थे जैसे "नमक सत्याग्रह" (1930)
भारत को आज़ादी दिलाने के लिए उन्होंने अहिँसा का रास्ता चुना और लोगो को हिंसा से दूर रहने को प्रेरित किया।

अहिँसा की आड़ में गांधी की राजनीति:-

गांधी ने कई युद्धों में अंग्रेज़ो की सहायता भी की
तथा कई फैसलो जो देश हित में नही थे, में अंग्रेज़ो का साथ दिया ताकि अंग्रेज़ो से दोस्ती बनी रही साथ ही देश मे अपनी छवि बनाकर बड़े राजनेता बन सके।

गांधी ने अधिकतर हिन्दुओ के साथ भेदभाव करते हुए मुस्लिमो को तवज़्ज़ो दी।
गांधी ने हिन्दुओ से भेदभाव करते हुए खिलाफत आन्दोलन जैसे साम्प्रदायिक आन्दोलन को राष्ट्रीय आन्दोलन बनाया। गांधी की सहमति से मंदिर में नमाज़ पड़ी गयी पर मज़्ज़िद में गीता पड़े जाने का खुद गांधी ने विरोध किया।

:-आदर्श क्रांतिकारी के तौर पर चर्चित भगत सिंह उस समय अंग्रेज़ो से अपना लोहा मनवाने वाले बहादुर क्रांतिकारी थे।
उन्होंने अंग्रेज़ो से आज़ादी के लियेे बहुत प्रयास किये.


भगत सिंह
पिता- सरदार किशन सिंह संधू
माता- विद्यावती देवी



  • जन्म- 28 सितम्बर 1907(गाँव बंगा, जिला लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में) जाट (सिक्ख))
  • शिक्षा- National College, Lahore, National College of Arts ,Dayanand Anglo-Vedic Schools System
  • मृत्यु- 23 मार्च 1931 ,लाहौर जेल, पंजाब (अब पाकिस्तान में)(फांसी)

नोजवान क्रांतिकारी होने के कारण उनमे जोश भरपुर था ।
भगत सिंह गांधी के अहिंसावादी विचारो के खिलाफ थे फिर भी उन्होंने एक बार गांधी के रास्ते चलने की कोशीश की और साइमन कमीशन को वापस लौटने के लिए भूख हड़ताल की।

(भगत सिंह की भूख हड़ताल का पोस्टर जिस पर उनके ही नारे छपे हैं. पोस्टर नेशनल आर्ट प्रेस, अनारकली, लाहौर ने प्रिंट किया था)

परंतु न गांधी ने और न ही अंग्रेज़ो ने उनपर ध्यान दिया।
इसी मकसद से कांग्रेस के बड़े नेता लाला लाजपत राय भी साइमन कमीशन का विरोध कर रहे थे पर अंग्रेज़ो की लाठियो ने उन्हें और उनके साथियों को घायल कर दिया तथा कुछ ही दिनों बाद लाला जी की मृत्यु हो गयी
गांधी ने इसकी आलोचना तक नही की।

इस घटना पर भगत सिंह का खून खोल उठा और उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस सुपिरिटेंडेंट स्कॉट की हत्या करने की योजना बनाई.
लेकिन एक साथी की ग़लती की वजह से स्कॉट की जगह 21 साल के पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या हो गई।
इस मामले में भगत सिंह पुलिस की गिरफ़्त में नहीं आ सके, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने असेंबली सभा में बम फेंका।

(असेम्बली पर बम फेंकने के बाद एक दैनिक अखबार में छपी खबर)

भगत सिंह जनहानि नहीं करना चाहते थे, लेकिन वह बहरी अंग्रेज सरकार के कानों तक देश की सच्चाई की गूंज पहुंचाना चाहते थे।
बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त भाग सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी गिरफ़्तारी दे दी।

(असेंबली बम केस में भगत सिंह के खिलाफ उर्दू में लिखा गया एफआईआर)

गिरफ़्तारी के वक़्त भगत सिंह के पास उस वक्त उनकी रिवॉल्वर भी थी। कुछ समय बाद ये सिद्ध हुआ कि पुलिस अफ़सर सांडर्स की हत्या में यही रिवॉल्वर इस्तेमाल हुई थी।
इसलिए, असेंबली सभा में बम फेंकने के मामले में पकड़े गए भगत सिंह को सांडर्स की हत्या के गंभीर मामले में अभियुक्त बनाकर फांसी दी गई।

(फांसी की सजा के लिए भगत सिंह के खिलाफ जारी किया गया मृत्यु पत्र/Death Warent)





17 फरवरी 1931 से वायसराय इरविन और गांधी के बीच बातचीत की शुरुआत हुई. इसके बाद 5 मार्च, 1931 को दोनों के बीच समझौता हुआ।
जिससे भारतीय क्रन्तिकारी आन्दोलन को बहुत धक्का लगा,
इस समझौते ने उन क्रांतिकारियों को आगे बढ़ने से रोका जो आगे जाकर बड़े राजनेता बन सकते थे, और यह गांधी की राजनीति थी ।

इस समझौते में आज़ादी के संघर्ष करने के दौरान पकड़े गए सभी कैदियों को छोड़ने की बात तय हुई।
मगर फांसी की सज़ा पाने वाले भगत सिंह को माफ़ी देने की इनमे कोई बात भी नही हुई
गांधी ने जानबूझकर समझौते में भगत सिंह का जिक्र तक नही किया।
यही से गांधी का विरोध शुरू हो गया
इस दौरान ये सवाल उठाया जाने लगा कि जिस समय भगत सिंह और उनके दूसरे साथियों को सज़ा दी जा रही है तब ब्रितानी सरकार के साथ समझौता कैसे किया जा सकता है।
साम्यवादी इस समझौते से नाराज़ थे और वे सार्वजनिक सभाओं में गांधी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने लगे
ऐसे में 23 मार्च 1931 के दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सज़ा दे दी गई.

(फांसी के बाद एक दैनिक अखबार में छपी फांसी की खबर)


कांग्रेस के अंदर सुभाष चंद्र बोस समेत कई लोगों ने भी गांधी और इरविन के समझौते का विरोध किया, वे मानते थे कि अंग्रेज सरकार अगर भगत सिंह की फ़ांसी की सज़ा को माफ़ नहीं कर रही थी तो समझौता करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।

तो इस पर गांधी का बयान था कि
"भगत सिंह अहिंसा के पुजारी नहीं थे, लेकिन हिंसा को धर्म नहीं मानते थे, उनके कृत्य का अनुकरण नहीं किया जाना चाहिए। उनके इस कृत्य से देश को फायदा हुआ हो, ऐसा मैं नहीं मानता, खून करके शोहरत हासिल करने की प्रथा अगर शुरू हो गई तो लोग एक दूसरे के कत्ल में न्याय तलाशने लगेंगे।"

इस विषय पर मौजूद रिसर्च के आधार पर ये कहा जा सकता है कि फांसी के दिन से पहले गांधी और वायसराय के बीच जो चर्चा हुई, उसमें भगत सिंह की फांसी के मुद्दे को गांधी ने गैरज़रूरी माना।

साथ ही जब डॉ॰ भीमराव अंबेडकर दलितो कों समान करने के लिए पृथक निर्वाचन नीति अपनाना चाहते थे
तो गांधी ने भूख हड़ताल की जबकि जब मुस्लिमो को इस प्रकार के अधिकार दिए गए तो तब गांधी को कोई अप्पति नही हुई।
तब बाबा साहेब ने कहा था कि
"यह एक पीड़ादायक आश्चर्य है कि गांधी ने केवल अछूत लोगो को ही अपने विरोध के लिए चुना है, जबकि भारतीय मुसलमानों को मिले इसी (पृथक निर्वाचन के) अधिकार के बारे में गाँधी ने कोई आपत्ति नहीं की।" उन्होंने आगे कहा की "गांधी कोई अमर व्यक्ति नहीं हैं। भारत में ऐसे अनेकों महात्मा आए और अनेको चले गए, जिनका लक्ष्य छुआछूत को समाप्त करना था, परंतु अछूत, अछूत ही रहे।" उन्होंने कहा कि गाँधी के प्राण बचाने के लिए वे अछूतों के हितों की बलि नहीं दे सकते।"

पश्चात कस्तूरबा गांधी व उनके पुत्र देवदास गांधी बाबासाहब आम्बेडकर के पास गए और उनसे प्रार्थना की कि वे गांधी के प्राण बचा ले
24 सितम्बर 1932 को साय पांच बजे यरवदा जेल पूना में गाँधी और डॉ॰ आम्बेडकर के बीच समझौता हुआ, जो बाद में पूना पैक्ट के नाम से मशहूर हुआ। इस समझौते में डॉ॰ आम्बेडकर को कम्युनल अवॉर्ड में मिले पृथक निर्वाचन के अधिकार को छोड़ना पड़ा तथा संयुक्त निर्वाचन (जैसा कि आजकल है) पद्धति को स्वीकार करना पडा।
आम्बेडकर इस समझौते से असमाधानी थे, उन्होंने गांधी के इस अनशन को अछूतों को उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने और उन्हें उनकी माँग से पीछे हटने के लिये दवाब डालने के लिये गांधी द्वारा खेला गया एक नाटक करार दिया। 1942 में आम्बेडकर ने इस समझौते का धिक्कार किया, उन्होंने ‘स्टेट आॅफ मायनॉरिटी’ इस अपने ग्रंथ में भी पूना पैक्ट संबंधी नाराजगी व्यक्त की हैं। भारतीय रिपब्लिकन पार्टी द्वारा भी इससे पहले कई बार धिक्कार सभाएँ हुई हैं।

इसके अतिरिक जवाहर लाल नेहरू भी गांधी की ही तरह प्रमुख राजनेता बनना चाहते थे तथा भारत की बागडोर संभालना चाहते थे तो वही मुस्लिमों की तरफ से मोहम्मद अली जिन्नाह भी भारत की बागडोर सम्भलना चाहते थे
गांधी इन दोनों के करीब था
ओर साथ ही नगरु ओर जिन्ना अत्यधिक करीब थे

अन्य सूत्र तथा कई साक्ष्य ये बताते है कि नेहरू तथा जिन्ना भाई थे। मोतीलाल नेहरू की पांच पत्निया थी जिनमे एक कानूनन  पत्नी थी तथा अन्य तीन गैर सम्बन्धी पत्निया थी जिसमे से एक कि संतान था जिन्ना

जब दोनों भाई एक राजा की तरह गद्दी पर बैठना चाहते थे तो गांधी ने दोनो को खुश करने के लिए करने के लिए पाकिस्तान का जिक्र किया
दोनों भाइयों को बागडोर मीले इस एवज़ में गांधी ने भारत के टुकड़े किये
भारत तेरे टुकडे होंगे
यह तो खुद गांधी का सिद्धांत था
इस वक्त गांधी इतना बड़ा राजनेता ओर शातिर राजनीतिघ्य बन चुका था कि भारत के टुकड़े करना उसके लिए बहुत आसान है।

इसी के बाद अत्यधिक विरोध के बाद भी गांधी ने भारत के टुकड़े कर दिए
पश्चात पाकिस्तान ने भारत के कश्मीर पर हमला कर दिया बावजूद इसके पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिलाने के लिके हड़ताल की ।

ऐसे व्यक्ति को महान साथ ही हमारे देश का राष्ट्रपिता कहा जाता है।
यदि आज भी गांधी होता तो कश्मीर क्या पंजाब राजस्थान सब पाकिस्तान के पास होते।
गांधी के होने पर आज सिर्फ एक पाकिस्तान नही बल्कि भारत से सेकड़ो पाकिस्तान निकल जाते और भारत सिर्फ एक टुकड़े की भांति रह जाता।

हमारे देश मे गांधी की छवि एक महान व्यक्ति के रूप में है, बल्कि देश की अधिकतर जनता गांधी को गलत मानती है।
वर्तमान में हमारे देश मे कई बड़े राजनेता भी गांधी को गलत मानते है पर वो ये जाहिर नही कर सकते क्योंकि यदि वो ऐसा करते है तो उनके दुश्मन या उनके विपक्षी उन्हें नीचा दिखाने के लिए उनका विरोध करते है।
गांधी देश के लिए अच्छा सोचते थे या बुरा, हम कह नही सकते, पर ये सच है कि गांधी ने जो कुछ किया वो देश हित मे नही था।

:-
आप गांधी के बारे में क्या सोचते है
,गांधी सही थे या गलत
Comment में जरूर बताएं।
अपनी राय अवश्य दे।

आर्टिकल गांधी भाग-2 जल्द ही प्रकाशित होगा जिसमें नाथूराम गोडसे के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की चर्चा होगी।

Vijay Merotha

Comments

Popular posts from this blog

कृष्ण कि महाभारत || विजय मेरोठा ||

बेटियां (VJ)...

ऐ ज़िन्दगी तू चल, में अभी आता हूं। VJ